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ग़ज़ल

ऐसा वैसा कैसा है.
मैंने उसको देखा है.

घर वाले सब झूठे हैं
सच्चा घर में तोता है.

पकी फसल है चारो ओर
और बिजूका भूखा है.

छत कहती है सुनते हो
पानी ताप-ताप गिरता है.

---मुहम्मद अलवी   

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